हरियाणा में राज्य सरकार ने दो वर्ष पूर्व मीडिया पॉलिसी के निर्माण की
दिशा में पहलकदमी की थी। यह एक स्वगतयोग्य सकारात्मक कदम था। मगर एक तथ्य
यह भी है कि इस अहम मामले में उस पहले कदम के बाद जो काम होना चाहिए था
वह न जाने क्यूं नही हो पाया। लिहाजा, जहां तक राज्य की मीडिया नीति का
प्रश्न है, इस मोर्चे पर अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग ने सूचना व जनसंपर्क विभाग के सहयोग
से इस कार्य को आगे बढाने का निर्णय लिया है। पत्रकारिता विभाग ने इस
सिलसिले में गंभीर विचार मंथन के लिए मीडिया विशेषज्ञों को एक मंच पर
लाने की योजना बनाई है। नवंबर माह में हम सिरसा में एक कार्यशाला आयोजित
करने की तैयारी में हैं जिसमें वरिष्ठ कामकाजी पत्रकारों, पत्रकारिता के
प्रशिक्षण में जुटे शिक्षाविदों व सरकार की नीतियों को बनाने व उन्हें
अमली जामा पहनाने के लिए उत्तरदायी आला अधिकारियों को आमंत्रित किया
जाएगा। किसी भी सरकार की मीडिया नीति क्या होनी चाहिए,उसके विभिन्न अंग-
उपांग क्या हो सकते हैं और उसे अमल में लाने की प्रक्रिया क्या हो, ऐसे
तमाम सवालों पर विमर्श की प्रक्रिया में हम प्रजातांत्रिक व्यवस्था के
अन्य अंगों मसलन न्यायपालिका व विधायिका के प्रतिनिधियों को भी शामिल
करने का प्रयास करेंगें। इस विषय में ऐसे प्रत्येक महानुभाव से हमें
सहयोग की उम्मीद है जो भारतीय प्रजातंत्र की सेहत को दुरूस्त रखने में
अपनी भूमिका को सहजता से स्वीकार करते हों। इस संबंध में अपनी टिप्पणियां
व सुझाव हमें अवश्यक लिखें। मीडिया नीति संबंधी कोई दस्तावेज आपके पास
हैं और आप उसे इस विमर्श के लिए साझा करना चाहें तो हमें उसकी एक प्रति
डाक अथवा ईमेल से तत्काल भिजवाने की कृपा करें।
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