मीडिया के आंगन में मंदी की दस्तक

-मंदीप चौहान-

आर्थिक मंदी के जिस दौर से समूचा विश्व गुजर रहा है उसका असर मीडिया संगठनों पर भी नजर आने लगा है। मंदी की मांद अर्थात अमरीका में यह सर्वाधिक है तो भारत सरीखे मंदी से अपेक्षाकृत कम प्रभावित देशों में यह असर कुछ कम है। खबर है कि अमरीका में समाचार पत्रों की सबसे बडी चेन संचालित करने वाली गेन्नेट कंपनी ने ऐलान किया है कि वह दिसंबर में अपने लगभग दस फीसदी कर्मचारियों की छंटनी करेगी। खर्चे घटाने के नाम पर किया जा रहा यह कार्य करने वाली यह पहली अमरीकी कंपनी नहीं है।
इससे पूर्व न्यूयार्क टाइम्स से लेकर विश्व की सबसे बडी मैगजीन कंपनी टाइम वार्नर तक सब इस तरह के संकेत दे चुके है। वार्नर समूह ने कंपनी में ढांचागत बदलाव करते हुए छह सौ नौकरियां कम करने का ऐलान गत दिनों किया था। टाइम वार्नर समूह टाइम मैगजीन के अलावा सीएनएन चैनल व अमेरिका ऑनलाइन इंटरनेट सर्विस का संचालन भी करती है।
न्यूयार्क टाइम्स के हवाले से एनडीटीवी ने एक समाचार में कहा है गेन्नेट समूह अमरीका में 85 दैनिक समाचार पत्रों के अलावा आठ सौ से अधिक लघु समाचार पत्र चलाती है और इसके सबसे प्रमुख पत्र यूसए टुडे को छोडकर तमाम अन्य पत्रों पर मंदी की मार गिरेगी। एक अनुमान के अनुसार लगभग तीन हजार मीडियाकर्मियों को इस प्रक्रिया में नौकरी गंवानी पडेगी। कहना न होगा कि प्रसार संख्या के लिहाज से अमरीका का सबसे बडा समाचार पत्र समूह है। विशेषज्ञों का कहना है कि मंदी के दौर में समाचार पत्रों को विज्ञापन से मिलने वाले राजस्व में कमी के साथ पत्रों की प्रसार संख्या पर भी प्रभाव पडा है और ऐसा माना जा रहा है कि आर्थिक तंगी के दौर में लोग प्रिंट संस्करण खरीदने के बजाय इंटरनेट को समाचार पढने के जरिए के रूप में अधिक इस्तेमाल करने लगे हैं।
इससे पूर्व ब्रिटेन में उपभोक्ता पत्रिकाएं प्रकाशित करने वाली कंपनी आईपीसी मीडिया ने तीन माह के लिए नियुक्तियों पर रोक लगाकर मंदी से प्रभावित होने का प्रमाण दिया था। आईपीसी मीडिया भी टाइम वार्नर समूह का ही एक उपक्रम है। यह कंपनी ब्रिटेन में लगभग अस्सी पत्रिकाएं प्रकाशित करती है।
भारतीय मीडिया में मंदी के प्रभाव की झलक भडास फॉर मीडिया पर प्रकाशित पिछले सप्ताह की कुछ खबरों में साफ नजर आई। मसलन त्रिवेणी बिल्डर्स के समाचार चैनल वॉयस ऑफ इंडिया में छंटनी हुई है। कंपनी    द्वारा अपने कइ ब्यूरो कार्यालय बंद किए जाने की चर्चा है। ऐसा स्वाभाविक भी है चूंकि  कंपनी के संचालन चूंकि रियल एस्टेट के कारोबार में हैं और वहीं मंदी की सर्वाधिक मार पडी है। उस झटके का असर चैनल में नजर आना ही था।
इसी प्रकार पिछले सप्ताह बीएजी समूह के आंगन में मंदी का असर साफ दिखाई दिया। इस संदर्भ में भडास फॉर मीडिया ने लिखा कि  बैग (बीएजी) के चैनलों न्यूज 24 और ई 24 में छंटनी की खबर है। दिल्ली में न्यूज 24 से आधा दर्जन से ज्यादा वीडियो एडीटरों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इन लोगों को एक महीने की अग्रिम तनख्वाह देकर इनसे राम-राम कर लिया गया है। इसी तरह मुंबई में न्यूज 24 और ई 24 से संयुक्त रूप से तीन दर्जन से ज्यादा लोगों को बाहर का रास्ता दिखाए जाने की सूचना है। इनमें न्यूज और नान-न्यूज दोनों सेक्शन के लोग हैं। वैसे तो कहा जा रहा है कि यह छंटनी मंदी को देखते हुए की गई है लेकिन सूत्रों के मुताबिक बैग की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं चल रही है। काफी नुकसान दिया। न्यूज 24 को चलाने में भी काफी पैसा लग रहा है।
सच तो यह है कि मंदी के असर की बात सिर्फ बैग या वी ओ आई  तक सीमित नहीं है। पिछले कई महीने से लॉंचिंग की तैयारी में जुटे कुछ समूहों ने अपने कदमों की गति धीमी कर दी है। इस मंदचाल का भी सीधा संबंध बाजार की मंदी से ही है।

Courtesy:www.indianmedia.co.cc

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